OmniPanchang

होरा (ग्रह होरा) · श्रीनगर

शनिवार, 7 अगस्त 2027

दिन की होरा
  • शनिश्रम, मरम्मत, नित्य कार्य — नए उपक्रम वर्जित5:46 am – 6:54 am
  • गुरुशिक्षा, धन, शुभ आरंभ — सर्वाधिक श्रेष्ठ6:54 am – 8:02 am
  • मंगलविवाद तथा उग्रता — नए कार्य के लिए वर्जित8:02 am – 9:11 am
  • सूर्यअधिकार, सरकारी कार्य तथा बड़ों से व्यवहार9:11 am – 10:19 am
  • शुक्रकला, संगीत, विवाह, सुख तथा सौंदर्य10:19 am – 11:28 am
  • बुधअध्ययन, व्यापार, संवाद तथा लेखा-जोखा11:28 am – 12:36 pm
  • चन्द्रयात्रा, जल, भावनात्मक तथा घरेलू कार्य12:36 pm – 1:44 pm
  • शनिश्रम, मरम्मत, नित्य कार्य — नए उपक्रम वर्जित1:44 pm – 2:53 pm
  • गुरुशिक्षा, धन, शुभ आरंभ — सर्वाधिक श्रेष्ठ2:53 pm – 4:01 pm
  • मंगलविवाद तथा उग्रता — नए कार्य के लिए वर्जित4:01 pm – 5:09 pm
  • सूर्यअधिकार, सरकारी कार्य तथा बड़ों से व्यवहार5:09 pm – 6:18 pm
  • शुक्रकला, संगीत, विवाह, सुख तथा सौंदर्य6:18 pm – 7:26 pm
रात की होरा

शनिवार, 7 अगस्त 2027 – रविवार, 8 अगस्त 2027

  • बुधअध्ययन, व्यापार, संवाद तथा लेखा-जोखा7:26 pm – 8:18 pm
  • चन्द्रयात्रा, जल, भावनात्मक तथा घरेलू कार्य8:18 pm – 9:10 pm
  • शनिश्रम, मरम्मत, नित्य कार्य — नए उपक्रम वर्जित9:10 pm – 10:01 pm
  • गुरुशिक्षा, धन, शुभ आरंभ — सर्वाधिक श्रेष्ठ10:01 pm – 10:53 pm
  • मंगलविवाद तथा उग्रता — नए कार्य के लिए वर्जित10:53 pm – 11:45 pm
  • सूर्यअधिकार, सरकारी कार्य तथा बड़ों से व्यवहार11:45 pm – 12:36 am
  • शुक्रकला, संगीत, विवाह, सुख तथा सौंदर्य12:36 am – 1:28 am
  • बुधअध्ययन, व्यापार, संवाद तथा लेखा-जोखा1:28 am – 2:20 am
  • चन्द्रयात्रा, जल, भावनात्मक तथा घरेलू कार्य2:20 am – 3:11 am
  • शनिश्रम, मरम्मत, नित्य कार्य — नए उपक्रम वर्जित3:11 am – 4:03 am
  • गुरुशिक्षा, धन, शुभ आरंभ — सर्वाधिक श्रेष्ठ4:03 am – 4:55 am
  • मंगलविवाद तथा उग्रता — नए कार्य के लिए वर्जित4:55 am – 5:46 am
संकेत
  • सूर्यअधिकार, सरकारी कार्य तथा बड़ों से व्यवहार
  • चन्द्रयात्रा, जल, भावनात्मक तथा घरेलू कार्य
  • मंगलविवाद तथा उग्रता — नए कार्य के लिए वर्जित
  • बुधअध्ययन, व्यापार, संवाद तथा लेखा-जोखा
  • गुरुशिक्षा, धन, शुभ आरंभ — सर्वाधिक श्रेष्ठ
  • शुक्रकला, संगीत, विवाह, सुख तथा सौंदर्य
  • शनिश्रम, मरम्मत, नित्य कार्य — नए उपक्रम वर्जित