OmniPanchang

होरा (ग्रह होरा) · मेरठ

सोमवार, 4 अक्टूबर 2027

दिन की होरा
  • चन्द्रयात्रा, जल, भावनात्मक तथा घरेलू कार्य6:13 am – 7:12 am
  • शनिश्रम, मरम्मत, नित्य कार्य — नए उपक्रम वर्जित7:12 am – 8:11 am
  • गुरुशिक्षा, धन, शुभ आरंभ — सर्वाधिक श्रेष्ठ8:11 am – 9:10 am
  • मंगलविवाद तथा उग्रता — नए कार्य के लिए वर्जित9:10 am – 10:09 am
  • सूर्यअधिकार, सरकारी कार्य तथा बड़ों से व्यवहार10:09 am – 11:08 am
  • शुक्रकला, संगीत, विवाह, सुख तथा सौंदर्य11:08 am – 12:07 pm
  • बुधअध्ययन, व्यापार, संवाद तथा लेखा-जोखा12:07 pm – 1:06 pm
  • चन्द्रयात्रा, जल, भावनात्मक तथा घरेलू कार्य1:06 pm – 2:05 pm
  • शनिश्रम, मरम्मत, नित्य कार्य — नए उपक्रम वर्जित2:05 pm – 3:04 pm
  • गुरुशिक्षा, धन, शुभ आरंभ — सर्वाधिक श्रेष्ठ3:04 pm – 4:03 pm
  • मंगलविवाद तथा उग्रता — नए कार्य के लिए वर्जित4:03 pm – 5:02 pm
  • सूर्यअधिकार, सरकारी कार्य तथा बड़ों से व्यवहार5:02 pm – 6:02 pm
रात की होरा

सोमवार, 4 अक्टूबर 2027 – मंगलवार, 5 अक्टूबर 2027

  • शुक्रकला, संगीत, विवाह, सुख तथा सौंदर्य6:02 pm – 7:03 pm
  • बुधअध्ययन, व्यापार, संवाद तथा लेखा-जोखा7:03 pm – 8:04 pm
  • चन्द्रयात्रा, जल, भावनात्मक तथा घरेलू कार्य8:04 pm – 9:05 pm
  • शनिश्रम, मरम्मत, नित्य कार्य — नए उपक्रम वर्जित9:05 pm – 10:06 pm
  • गुरुशिक्षा, धन, शुभ आरंभ — सर्वाधिक श्रेष्ठ10:06 pm – 11:07 pm
  • मंगलविवाद तथा उग्रता — नए कार्य के लिए वर्जित11:07 pm – 12:08 am
  • सूर्यअधिकार, सरकारी कार्य तथा बड़ों से व्यवहार12:08 am – 1:09 am
  • शुक्रकला, संगीत, विवाह, सुख तथा सौंदर्य1:09 am – 2:10 am
  • बुधअध्ययन, व्यापार, संवाद तथा लेखा-जोखा2:10 am – 3:11 am
  • चन्द्रयात्रा, जल, भावनात्मक तथा घरेलू कार्य3:11 am – 4:12 am
  • शनिश्रम, मरम्मत, नित्य कार्य — नए उपक्रम वर्जित4:12 am – 5:13 am
  • गुरुशिक्षा, धन, शुभ आरंभ — सर्वाधिक श्रेष्ठ5:13 am – 6:14 am
संकेत
  • सूर्यअधिकार, सरकारी कार्य तथा बड़ों से व्यवहार
  • चन्द्रयात्रा, जल, भावनात्मक तथा घरेलू कार्य
  • मंगलविवाद तथा उग्रता — नए कार्य के लिए वर्जित
  • बुधअध्ययन, व्यापार, संवाद तथा लेखा-जोखा
  • गुरुशिक्षा, धन, शुभ आरंभ — सर्वाधिक श्रेष्ठ
  • शुक्रकला, संगीत, विवाह, सुख तथा सौंदर्य
  • शनिश्रम, मरम्मत, नित्य कार्य — नए उपक्रम वर्जित